आपका बच्चा डरपोक या दब्बू तो नहीं

बच्चे फूल की तरह नाजुक व कोमल होते हैं । बचपन में ही बच्चे के कोमलमन पर भयानक दबाव पड़ने से अक्सर बच्चे डरपोक या आजकल की भाषा में कहें तो दब्बू बन जाते हैं।

ऐसे बच्चे सदैव एकांत यह अकेलापन ढूंढ कर अपने आप में ही खुश रहने का प्रयास करते हैं। उन्हें किसी से भी बातचीत में दिलचस्पी नहीं होती है । नन्हा मासूम सदा उदासी पर लिए सभी बच्चों में अलग सड़क खड़ा सा नजर आता है ।

मनोवैज्ञानिक व बच्चों पर कार्य कर रहे कई सामाजिक संस्थाओं के लोग यह मानते हैं कि जाने अनजाने कई कारणों से बच्चे डरपोक बनते चले जाते हैं। बचपन में बच्चे के डरपोक होने के निम्न कारण हो सकते हैं ।जैसे जाने अनजाने माता पिता के गुस्से केकारण ,बचपन में कोई भयानक हादसा घटने से ,भयानक दृश्य देखने के कारण ,डरावनी कहानियां आ रही कुछ कारण हो सकते हैं जो बच्चों के कोमल मन पर प्रभाव डालते हैं । इन सब सेबच्चों के मन पर बुरा असर पड़ता है और धीरे धीरे यह समस्या बच्चों में पनपती जाती है ।

ऐसे में बच्चों को किस प्रकार सम्मान अवस्था में लाकर उन्हें मुक्त रखा जाए । इसके लिए निम्नसुझावों पर ध्यान दें ।

1  बच्चों की कोमल भावनाओं को समझ कर उनकी मन की बातों को समझें ।

2  हर समय उन पर सिर्फ पढने के लिए ही दबाव न डालें । बच्चों को पढ़ने के साथ साथ खेलकूद का के लिए भी पर्याप्त समय दें।

3  बच्चे द्वारा कोई अच्छा कार्य किए जाने पर सामयिक रूप से उनकी प्रशंसा करें इससे बच्चे का मनोबल ऊंचा।होगा ।

4  घर में बच्चों के साथ अति डरावनी फिल्में न देखें वह बच्चों कोडरावनी कहानियां बार बार न सुनाए ।

5  बच्चों के साथ अपनत्व और प्रेम का व्यवहार करें । समय समय पर बच्चों को सर्कस चिड़िया घर दिखाने ले जाएं जिससे उनका मनोरंजन भी होगा और पशुओं के बारे में जानकारी प्राप्त होगी।

ध्यान रखें बच्चों के नाजुक दिल पर कोई भी असर उन्हें साहसी व डरपोक बना सकता है ।उपरोक्त बातों को अमल में लाकर अपने बच्चे की जिंदगी को खुशहाल बना सकते है ।