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नवरात्रि पारण: उपवास के बाद आहार और स्वास्थ्य,सावधानी


​नौ दिनों के सात्विक भोजन और उपवास के बाद, शरीर की जठराग्नि (Digestive fire) धीमी हो जाती है। व्रत खोलने के बाद अगले 48 से 72 घंटे बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।

शुरुवात तरल पदार्थों से करें
​व्रत खोलने के तुरंत बाद भारी भोजन न करें। अपने शरीर को हाइड्रेट करना प्राथमिकता होनी चाहिए।
​नारियल पानी या नींबू पानी: यह शरीर के इलेक्ट्रोलाइट्स को संतुलित करता है।

​ताजे फलों का रस: बिना चीनी मिलाए फलों का रस लें।
​2. क्रमिक आहार (Gradual Re-introduction)
​एकदम से रोटी, पराठा या भारी दालें खाने के बजाय सुपाच्य भोजन चुनें:
​मूँग दाल की खिचड़ी: यह पेट के लिए सबसे हल्की और पौष्टिक होती है।
​छाछ या दही: प्रोबायोटिक्स पाचन तंत्र को फिर से सक्रिय करने में मदद करते हैं।उबली हुई सब्जियाँ: कद्दू, लौकी या तोरई जैसी सब्जियाँ आसानी से पच जाती हैं।


इन चीजो से बचें (Avoid These)
​व्रत खत्म होते ही उत्सव के माहौल में अक्सर लोग गलती कर बैठते हैं। इनसे बचें:
​अत्यधिक तेल और मसाले: पूरी, पकोड़े या ज्यादा मिर्च-मसाले वाला खाना एसिडिटी और पेट दर्द का कारण बन सकता है।
​कैफीन: खाली पेट ज्यादा चाय या कॉफी पीने से बचें।
​मैदा और जंक फूड: पिज्जा, बर्गर या मैदे से बनी चीजों को कम से कम 3-4 दिन न खाएं।

भोजन का तरीका और समय
​छोटे अंतराल पर खाएं: एक बार में भरपेट खाने के बजाय, थोड़े-थोड़े अंतराल पर भोजन लें।
​खूब चबाएं: पाचन की शुरुआत मुँह से होती है, इसलिए भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाएं।

शारीरिक गतिविधि और आराम
​उपवास के बाद शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस हो सकती है, इसलिए भारी वर्कआउट के बजाय योग या हल्की सैर करें।
​पर्याप्त नींद लें ताकि शरीर अंदरूनी मरम्मत (Recovery) कर सके

डिस्क्लेमर (Disclaimer)
​यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। यदि आप मधुमेह (Diabetes), उच्च रक्तचाप या किसी अन्य गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, तो उपवास खोलने और अपने आहार में बदलाव करने से पहले कृपया अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ डायटिशियन से परामर्श अवश्य लें।