*स्वामी विवेकानंद द्वारा दिए गए भाषण आज भी उतने ही सामायिक और प्रासंगिक / प्रेमचंद अग्रवाल।*

ऋषिकेश दिनांक 12 सितंबर 2021_
स्वामी विवेकानंद द्वारा विश्व धर्म सम्मेलन में दिए गए भाषण को 128 वर्ष पूरे होने के मौके पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि 11 सितंबर यानी आज ही के दिन साल 1893 में शिकागो में एक ऐसा ऐतिहासिक भाषण दिया था। जिसने भारतीय संस्कृति की प्रमुखता को खूबसूरती से प्रदर्शित किया हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति की गहराई पर आधारित विवेकानंद की इस भाषण की हर और सराहना हुई थी।
इस अवसर पर प्रेमचंद अग्रवाल ने स्वामी जी का स्मरण करते हुए समाज की सेवा में निरंतर अपना सहयोग प्रदान करने वाली विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों को सम्मानित भी किया।
बैराज स्थित कैंप कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने लायंस क्लब देवभूमि ऋषिकेश के अध्यक्ष विशाल, लायंस क्लब डिवाइन के अध्यक्ष जगमीत सिंह, लायंस क्लब रॉयल के अध्यक्ष हिमांशु अरोड़ा, रोटरी क्लब ऋषिकेश सेंटर के अध्यक्ष संजय, रोटरी क्लब ऋषिकेश के अध्यक्ष रवि कौशल, व्यापार सभा के अध्यक्ष मनोज कालरा, भारत स्वाभिमान ट्रस्ट से सुनीता खंडूडी, लायंस क्लब से गोपाल नांरग, सेवनिर्वित्त राजकीय पेंशनर संगठन के अध्यक्ष कृष्ण अग्रवाल को शाल ओढ़ाकर एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया।

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ने सभी संस्थाओं द्वारा क्षेत्र में समाज के लिए किए जा रहे सेवा कार्यों एवं संस्कृति, संस्कारों को बढ़ावा देने में दिये जा रहे योगदान के लिए आभार व्यक्त किया।
इस मौके पर विधानसभाध्यक्ष ने कहा कि 11 सितंबर की तारीख को दो घटनाओं के कारण याद किया जाता है, पहली घटना 11 सितंबर 1893 की है, जब स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका के शिकागो शहर में आयोजित धर्म संसद में प्रसिद्ध भाषण दिया था।
दूसरी घटना 11 सितंबर 2001 की है। जब अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर अलकायदा ने आतंकी हमला कर उसको जमींदोज कर दिया था। इस हमले के बहुत पहले ही स्वामी विवेकानंद ने यह बात कही थी कि दुनिया में धर्म के नाम पर सबसे ज्यादा रक्तपात होगा। कट्टरता और सांप्रदायिकता मानवता के सबसे बड़े दुश्मन हैं। शायद यही वह कारण है जिसकी वजह से आज भी स्वामी विवेकानंद का वह भाषण सामयिक और प्रासंगिक बना हुआ है।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने अपने संबोधन में सांप्रदायिकता, धार्मिक कट्टरता और हिंसा का मुद्दा बखूबी उठाया था। उन्होंने कहा था कि सांप्रदायिकता और कट्टरता लंबे वक्त से धरती को अपने शिकंजे में जकड़े हुए है और पृथ्वी को हिंसा से भर दिया है।अपने भाषण में सहनशीलता और सार्वभौमिकता का मसला भी उठाया था। आज शिकागो में स्वामी विवेकानंद के मशहूर भाषण के सवा सौ साल से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन उन्होंने जिन मुद्दों पर प्रकाश डाला था वे आज भी मौजूद हैं और उनका भाषण आज भी उतना ही प्रासंगिक है।आज भी जब उनके इस भाषण की गूंज कानों में पड़ती है, लोगों का हृदय अपार हर्ष से भर जाता है. ना सिर्फ भारतीय बल्कि दुनिया भर में लोगों ने उनके इस भाषण की प्रशंसा की थी।
