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अनुसूया माता मंदिर : यहां बच्चे बन गए थे ब्रह्मा, विष्णु और महेश, जानिए मान्यता

मां अनुसूया के दरबार में दो दिसंबर से मेला शुरू हो रहा है। यहां निसंतान दंपत्ति और भक्तजन अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए पहुचेंगे। मान्यता है कि मां के दर से कोई खाली हाथ नहीं लौटता। मां सबकी झोली भरती है। इसलिए निसंतान दंपत्ति पूरी रात जागकर मां की पूजा अर्चना कर करेंगे। इस मौके पर मां का जयकारा करने के लिए हजारों भक्त भी पहुंचेंगे।

दत्तात्रेय जयंती पर आयोजित होने वाले दो दिवसीय मेले के साथ-साथ भगवती सती मां अनसूया की पूजा अर्चना भी होगी। संतान की कामना को लेकर अनेक स्थानों से निसंतान दंपत्ति भी जुटेंगे। अनसूया मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष बीएस झिंक्वाण ने बताया कि संतान कामना के साथ-साथ भगवती मां अनसूया और दत्तात्रेय भगवान की उपासना के लिए संपूर्ण भारत से लोग यहां आते है। अनुसूया मन्दिर उत्तराखण्ड के चमोली ज़िले में मंडल से करीब छह किलोमीटर की ऊंचाई पर पहाड़ों में स्थित है। यह मन्दिर देवी अनुसूया को समर्पित है। यहां प्रतिवर्ष दत्तात्रेय जयंती समारोह मनाया जाता है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर में जप और यज्ञ करने वालों को संतान की प्राप्ति होती है। इसी मान्यताओं के अनुसार, इसी स्थान पर माता अनसूया ने अपने तप के बल पर ‘त्रिदेव’ (ब्रह्मा, विष्णु और शंकर) को शिशु रूप में परिवर्तित कर पालने में खेलने पर मजबूर कर दिया था। बाद में काफी तपस्या के बाद त्रिदेवों को पुन: उनका रूप प्रदान किया और फिर यहीं तीन मुख वाले दत्तात्रेय का जन्म हुआ। इसी के बाद से यहां संतान की कामना को लेकर लोग आते हैं। यहां ‘दत्तात्रेय मंदिर’ की स्थापना भी की गई है। अनसूया मंदिर के पूजारी परिवार के डा. प्रदीप बताते है कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने मां अनुसूया के सतीत्व की परीक्षा लेनी चाही थी, तब उन्होंने तीनों को शिशु बना दिया। यही त्रिरूप दत्तात्रेय भगवान बने। उनकी जयंती पर यहां मेला और पूजा अर्चना होती है।

कैसे पहुंचे

सड़क मार्ग से गोपेश्वर मंडल तक पहुंचा जा सकता है। मंडल गेट से चार किमी जंगल के रास्ते सुंदर और खूबसूरत जंगल के बीच पैदल मार्ग से अनसूया मंदिर पहुंचा जा सकता है। यहां शनिवार की रात्रि को मंदिर के अंदर भगवती के आगे संतान का वरदान मांगने के लिए दंपत्ति जुटेंगे।

पंडित मदन मोहन मोहन शर्मा ( पुरोहित)