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मदरसों को बढ़ावा देने की केंद्र सरकार की मंशा को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। जाने क्या है आर्टिकल 14 और आर्टिकल 15

विकास तिवारी

हरिद्वार।

केंद्र सरकार केवल अपने वोट बैंक को बढ़ाने के लालच में मनमर्जी कार्य कर रही है  मोदी जी देश को बांटना जा रहे हैं जबकि हमारी शिक्षा पद्धति सभी को समान रूप से बिना भेदभाव के शिक्षा देती है यह बात  श्री ब्राह्मण सभा के अध्यक्ष पंडित अनिल कौशिक के हवाले से  उनके अधिवक्ता एडवोकेट अरविंद कुमार श्रीवास्तव ने  केंद्रीय मुख्य सचिव को  एक नोटिस भेजते हुए कही है  उन्होंने कहा कि सरकार के इस गलत निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी जाएगी।
एडवोकेट अरविंद श्रीवास्तव ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा की गई नई घोषणा जिसमें की जिसमें पांच करोड़ अल्पसंख्यकों को आरक्षण देने, वजीफा देने 100 नए मदरसे से बनाए जाने, सरकार उनके संवर्धन के लिए काम करेगी और मुस्लिमों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। कहा कि प्रधानमंत्री130 करोड़ की बात करते हैं, ओर 5 करोड मुस्लिमों के लिए अलग से व्यवस्था देना चाहते हैं। जबकि उन्हें घोषणा करनी चाहिए थी कि जो 130 करोड़ देशवासियों के हित में होती। कहा कि देश में चल रही शिक्षा पद्धति जो प्राइमरी स्कूल पर आधारित है। जिसमे पूर्व में सभी वर्ग के बच्चे समान शिक्षा प्राप्त करते थे। प्राइमरी स्कूलों में आज कम बच्चे पढ़ रहे हैं लेकिन आज इन स्कूलों की दुर्दशा के कारण कोई भी व्यक्ति अपने बच्चों को इन स्कूलों में पढ़ाना नहीं चाहता है। सरकार का स्टेप आर्टिकल 14 और आर्टिकल का वॉल्यूशन है। जिसमें बताया गया है कि जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा। आर्टिकल 15 के अंतर्गत सभी को समान सुरक्षा लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा। लेकिन केंद्र सरकार ने अपने वोट बैंक को बढ़ाने के लालच में एक तरफा मनमर्जी कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को बांटना चाह रहे हैं जबकि हमारी शिक्षा पद्धति सभी को समान शिक्षा समान रूप से शिक्षा देती है बिना भेदभाव के शिक्षा देती है आज उन स्कूलों को बंद कर दिया गया है और अलग से मदरसों को बढ़ावा दिया जा रहा है।