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​हनुमान जयंती: चिरंजीवी अस्तित्व और ज्योतिषीय रहस्य

हरिद्वार /2 अप्रैल 2026

​हनुमान जी केवल एक देवता नहीं, बल्कि इस कलयुग के जाग्रत देव हैं। शास्त्रों में उन्हें ‘चिरंजीवी’ कहा गया है, जिसका अर्थ है कि वे आज भी इस पृथ्वी पर सूक्ष्म रूप में विद्यमान हैं।

​1. शास्त्रीय प्रमाण और जन्म प्रसंग
​पुराणों के अनुसार, हनुमान जी का जन्म चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को हुआ था। स्कंद पुराण के अनुसार, शिव के 11वें रुद्र अवतार के रूप में उन्होंने अंजना और केसरी के यहाँ जन्म लिया।

​वायु पुत्र: उन्हें ‘मरुतनंदन’ कहा जाता है क्योंकि पवन देव ने ही भगवान शिव के तेज को माता अंजना के गर्भ तक पहुँचाया था।
प्रमाण: गोस्वामी तुलसीदास जी ने ‘हनुमान चालीसा’ में उनके पराक्रम का वर्णन करते हुए लिखा है— “चारों जुग परताप तुम्हारा, है परसिद्ध जगत उजियारा।” यह इस बात का प्रमाण है कि वे काल की सीमाओं से परे हैं।

ज्योतिष

​मंगल का प्रभाव: हनुमान जी मंगल ग्रह के नियंता देव माने जाते हैं। मान्यता है जिन जातकों की कुंडली में मंगल दोष या शनि की साढ़ेसाती होती है, उनके लिए इस दिन का पूजन वज्र कवच के समान कार्य करता है।
​सूर्य-शिष्य संबंध: ज्योतिषीय दृष्टि से वे सूर्य के शिष्य हैं। हनुमान जी ने सूर्य से ही नौ व्याकरणों का ज्ञान प्राप्त किया था, इसलिए इस दिन पूजन करने से व्यक्ति की बुद्धि और वाणी में अद्भुत ओज आता है।

​3. ​सिंदूर का रहस्य: ‘अध्यात्म रामायण’ के अनुसार, जब हनुमान जी ने माता सीता को अपनी मांग में सिंदूर लगाते देखा और उसका कारण श्रीराम की लंबी आयु जाना, तो उन्होंने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर मल लिया। यह उनके अनन्य प्रेम और भक्ति का चरम बिंदु है।
​अष्ट सिद्धि और नव निधि: हनुमान जी इकलौते ऐसे देव हैं जिन्हें माता सीता ने आठ सिद्धियों और नौ निधियों का स्वामी बनाया है। यह उन्हें ब्रह्मांड का सबसे शक्तिशाली “सॉफ्टवेयर इंजीनियर” (शक्ति का प्रबंधक) बनाता है।

​4. पूजन के लाभ और महत्व
​आज के डिजिटल युग में, हनुमान जी का चरित्र हमें ‘संकट प्रबंधन’ (Crisis Management) सिखाता है। समुद्र लांघने का साहस हो या संजीवनी बूटी खोजने की बुद्धिमत्ता, वे हर असंभव कार्य को सुगम बनाने के प्रतीक हैं।
​विशेष: हनुमान जी की पूजा में ‘सुंदरकांड’ का पाठ करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है।

​निष्कर्ष:
हनुमान जयंती केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर के भय को समाप्त करने और भक्ति के माध्यम से शक्ति प्राप्त करने का अवसर है। उनकी आराधना हमें सेवा, समर्पण और असीम साहस की प्रेरणा देती है।
​जय बजरंगबली!

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Disclaimer

इस लेख/पोस्ट में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, शास्त्रीय प्रमाणों और प्रचलित ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। हमारा उद्देश्य केवल सूचना पहुँचाना है। पाठक कृपया ध्यान दें कि किसी भी उपाय या जानकारी को व्यक्तिगत रूप से अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के धर्म- गुरु,विशेषज्ञ या विद्वान ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।