भगवानदास संस्कृत महाविद्यालय को बचाने को लिखा डीजीपी को पत्र
हरिद्वार।
मातृ सदन आश्रम ने डीजीपी को पत्र भेजकर बताया कि उत्तराखंड विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. महावीर अग्रवाल समेत अन्य शिक्षाविदों के खिलाफ दर्ज मुकदमे के मामले में पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए। वही फर्जी मुकदमा दर्ज करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग के साथ ही मुकदमा रद्द करने की मांग भी पत्र में की गई।
मातृ सदन आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती महाराज ने बताया कि अवधूत मंडल आश्रम के स्वामी की ओर से ज्वालापुर कोतवाली में 15जून को एक मुकदमा दर्ज कराया गया है। जिसमें उत्तराखंड विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. महावीर अग्रवाल और भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ भोला झा समेत पांच लोगों को नामजद करते हुए कूट रचना, धोखाधड़ी और कब्जे के आरोप लगाए हैं। बताया कि इस मामले में मातृ सदन पहले भी आपत्ति जता चुका है। अब ब्रह्मचारी दयानंद की ओर से डीजीपी को भेजे गए पत्र में आरोप लगाया है कि भगवानदास संस्कृत महाविद्यालय की जगह होटल बनाना चाहते हैं। जब प्राचार्य भोला ने इसका विरोध किया तो उनके खिलाफ साजिश रचकर झूठा मुकदमा लिखा गया। मातृ सदन के अध्यक्ष स्वामी शिवानंद के हवाले से ब्रह्मचारी दयानंद ने अपने पत्र में पुलिस अधिकारियों को साजिश में शामिल होने और संस्कृत विद्वानों के अपमान का आरोप लगाया है कि इस मामले में शिकायत को ज्वालापुर कोतवाली की पुलिस फरवरी में गलत मानकर खारिज कर चुकी है सत्ताधारी पार्टी और अधिकारियों के कहने से फर्जी मुकदमा दर्ज किया है। मुकदमा मुकदमा दर्ज करने वाले अधिकारियों के फर्जी शिकायत करने वालों पर कार्रवाई की मांग की है।

