भारत घरेलू सुरक्षा के साथ टेक्नोलॉजी व इक्विपमेंट को बाहर देशों को एक्सपोर्ट करने की भी दिशा में तेजी से आगे बढ़ा हैं – राजनाथ सिंह

आज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डेयर टू ड्रीम 2.0′ पुरस्कार विजेताओं और डीआरडीओ के युवा वैज्ञानिकों के सम्मान समारोह में बोलते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि मुझे खुशी है कि गुजरात विश्वविद्यालय ने पहल की है और आगे बढ़ने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। इस अवसर पर उन्होंने दी गुर्जर विश्वविद्यालय के कुलपति और अध्यक्ष डीआरडीओ को मेरी ओर से बधाई दी एवं
डीआरडीओ की निर्देशित अनुसंधान नीति आज जारी की और कहा कि यह भविष्य की निगरानी, रक्षात्मक और आक्रामक क्षमताएं जैसे महत्वपूर्ण विषय पर केंद्रित शोध में एक महत्वपूर्ण भूमिका ️ निभा️एगा️एगा️️️ ।
आज जिस तरह डीआरडीओ इंडस्ट्री टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की बात हो रही है, आने वाले समय में हमारी कोशिश होनी चाहिए कि हमारी इंडस्ट्री को इसकी जरूरत ही न पड़े।उन्होंने कहा कि भारत ऐसा देश है जहाँ क्लाइमेटकन्डीशन और इलाको में बड़ी विभिन्नता हैI यहां तापमान एक ओर हिमालय में सब- जीरो चला जाता है, वहीं डेसर्ट में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर पहुंच जाता है।ऐसे में हमें अपने रिसर्च एंड डवलपमेंट पर विशेष ध्यान करने, और इन तमाम जरूरतों के आधार पर अपने इक्विपमेंट्स का भी निर्माण करने की आवश्यकता है। आज दोहरे उपयोग वाली प्रौद्योगिकियां विकसितकरने की भी आवश्यकता है, जिससे बड़े sस्कैल पर मिलट्री और सिविल, दोनों को इसका लाभ मिल सकेI हमें अपनी आर्म्ड फोर्स को राज्य के अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए, रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर विशेष ध्यान करना पड़ेगा।
रक्षा मंत्री ने कहा कि आज हम न्यू इंडिया के डायमेंशन में, सिटी फ्यूचरिस्टिक टेक्नोलॉजी, जैसे- नैनो टेक्नोलॉजी क्वांटम कंप्यूटिं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक टेक्नोलॉजीस आदि पर काम कर रहे हैंI डीआरडीओ यंग साइंटिस्टस लैब और एडवांस टेक्नोलॉजी सेंटर्स इन क्षेत्रों में कार्य करना शुरू कर चुके हैं:
शुरू से लेकर अभी हाल के एलसीए मार्क 1-ए, अर्जुन मार्क-1-ए मुख्य युद्धक टैंक MR-SAM के कॉन्ट्रैक्ट और इंडक्शन तक, DRDO हमारी आर्म्ड फोर्स क्षमता बढ़ाने में लगातार सहयोग कर रहा है।
इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ चेयरमैन रेड्डी की सराहना कि और कहां उनके नेतृत्व में में डीआरडीओ ना सिर्फ तकनीकी रूप से उन्नत देशो की क्षमताओं को मिलान करने का प्रयास कर रहा है , बल्कि अपनी तरह की नई टेक्नोलॉजीस के नवाचार में भी बराबर लगा हुआ है।इन सभी उपायों के परिणामस्वरुप स्वदेशी रक्षा उद्योग दिए जा रहे कॉन्ट्रैक्ट की संख्या में वृद्धि के रूप में हुई है। हम न केवल अपनी घरेलू सुरक्षा की जरूरतपूरी करने, बल्कि टेक्नोलॉजी व इक्विपमेंट को बाहर देशों को एक्सपोर्ट करने की भी दिशा में तेजी से आगे बढ़े हैं।इन क़दमों से आज हमारे देश में नए-नए स्टार्ट-अप खड़े हुए हैं, एमएसएमई क्षमता उभर कर सामने आया है, और इसने एंप्लॉयमेंट जनरेशन में भी मदद की हैI मुझे यह कहते हुए भी गर्व होता है कि हमारी आर्म्ड फोर्स ने सेल्फ रिलायंस के प्रयास को पूरे जोश के साथ समर्थन दिया है।
