श्री श्री रविशंकर ने दिया मानवता को शांति और योग का संदेश,सौराष्ट्र से निकलेगी ‘शांति यात्रा’

ऋषिकेश /20मार्च 2026
आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक और आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने वैश्विक शांति और भारतीय सनातन संस्कृति की भव्यता को लेकर एक सशक्त आह्वान किया है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि “शंकर कण-कण में विराजमान हैं।” ईश्वर की सर्वव्यापकता को समझना ही सुखी जीवन का आधार है, जहाँ न केवल व्यक्ति स्वयं सुखी रहे, बल्कि समस्त चराचर जगत के कल्याण की कामना करे।
आज जब विश्व युद्ध और संघर्षों की चुनौतियों से जूझ रहा है, श्री श्री रविशंकर ने भारत की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारत अपनी सत्य और सनातन परंपराओं के साथ विकास की मुख्यधारा में आगे बढ़ रहा है। यह समय विनाश का नहीं, बल्कि विकास और योग के माध्यम से जुड़ने का है।
योग महोत्सव: सप्त चक्रों का ज्ञान और सरकारी प्रोत्साहन
योग महोत्सव के अवसर पर प्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने इसे जन-जन तक पहुँचाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान हजारों योग साधकों और योगाचार्यों को मूलाधार से लेकर सहस्त्रार चक्र तक की गूढ़ विद्या का ज्ञान दिया गया।
उन्होंने कहा कि योग को केवल अभ्यास तक सीमित न रखकर, शिक्षक बनकर भारतीय सनातन संस्कृति की दिव्यता और भव्यता का प्रकाश पूरे विश्व में फैलाना है।
उन्होने कहा कि जब हम भीतर से शांत होते हैं, तभी हम बाहर शांति स्थापित कर सकते हैं। योग केवल शरीर को मोड़ना नहीं, बल्कि आत्मा को जोड़ना है।
सौराष्ट्र से निकलेगी ‘शांति यात्रा’
श्रीश्री रवि शंकर ने आगामी योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया गया कि आर्ट ऑफ लिविंग जल्द ही सौराष्ट्र से एक विशेष यात्रा शुरू करने जा रहा है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य समस्त सृष्टि में शांति का वातावरण निर्मित करना और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ (सबका कल्याण, सबका विकास) के संकल्प को सिद्ध करना है।
इस आयोजन ने न केवल साधकों को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया, बल्कि आधुनिक विश्व को भारत की प्राचीन मेधा से भी परिचित कराया।

