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डिजिटल युग में बच्चे: वरदान या अभिशाप?

हरिद्वार / 29 मार्च 2026

​आज के दौर में डिजिटल दुनिया बच्चों के जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है। जहाँ एक ओर इंटरनेट ज्ञान का अथाह भंडार है, वहीं दूसरी ओर इसके अत्यधिक उपयोग से बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरे प्रभाव पड़ रहे हैं।

​डिजिटल दुनिया के लाभ

​डिजिटल तकनीक ने बच्चों के सीखने के तरीकों को पूरी तरह बदल दियाहै। ​शिक्षा में सुगमता : ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म और एजुकेशनल ऐप्स के माध्यम से बच्चे जटिल विषयों को भी आसानी से समझ पा रहे हैं

रचनात्मकता :कोडिंग, ग्राफिक डिजाइनिंग और डिजिटल आर्ट जैसे क्षेत्रों में बच्चों की रुचि बढ़ रही है, जो उनके भविष्य के लिए नए रास्ते खोल रहे हैं।

​वैश्विक जुड़ाव: इंटरनेट के जरिए बच्चे दुनिया भर की संस्कृतियों और नई जानकारियों से रू-ब-रू हो रहे हैं।


​बढ़ती चुनौतियां

सुविधाओं के साथ-साथ डिजिटल वर्ल्ड की अपनी चुनौतियां भी हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है:
​स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं: लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठने से आंखों की रोशनी पर असर पड़ना, नींद की कमी और शारीरिक सक्रियता कम होना आम बात हो गई है।
​साइबर सुरक्षा: छोटे बच्चों को इंटरनेट पर मौजूद असुरक्षित कंटेंट और साइबर बुलिंग जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
​एकाग्रता में कमी: शॉर्ट वीडियो और सोशल मीडिया की लत बच्चों की ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को प्रभावित कर रही है।

अभिभावकों की भूमिका
​बच्चों को डिजिटल दुनिया के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए ‘डिजिटल पैरेंटिंग’ का महत्व बढ़ गया है।
​स्क्रीन टाइम निर्धारित करें: बच्चों के खेलने, पढ़ने और गैजेट्स इस्तेमाल करने का समय तय होना चाहिए।
​संवाद बनाए रखें: बच्चों को इंटरनेट की अच्छाइयों और बुराइयों के बारे में खुलकर बताएं ताकि वे किसी भी परेशानी में आपसे बात कर सकें।
​फिल्टर और लॉक: गैजेट्स में पैरेंटल कंट्रोल का उपयोग करें ताकि बच्चे केवल उनके लिए उपयुक्त सामग्री ही देख सकें।

​निष्कर्ष: डिजिटल दुनिया एक दुधारी तलवार की तरह है। यदि इसका सही दिशा और संतुलन के साथ उपयोग किया जाए, तो यह बच्चों के सर्वांगीण विकास में मील का पत्थर साबित हो सकती है।