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पीड़ित महिला की आवाज बनेगा आयोग, मौके पर समाधान हमारा संकल्प: कुसुम कंडवाल

सम्मान सेतु’ में गूंजा नारी सम्मान का संदेश, 7200 से अधिक जागरूकता किट बांटीं


578 लोगों को निशुल्क कानूनी परामर्श, 489 से अधिक का स्वास्थ्य परीक्षण और 124 साइबर मामलों का निस्तारण

ऋषिकेश, 6 अगस्त। उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की ओर से राष्ट्रीय महिला आयोग के सहयोग से ऋषिकेश में आयोजित पांच दिवसीय ‘सम्मान सेतु’ अभियान में महिलाओं, कांवड़ श्रद्धालुओं और आम नागरिकों की बड़ी भागीदारी देखने को मिल रही है। सीमा डेंटल कॉलेज के सामने 4 से 8 अगस्त तक चल रहे शिविर में विधिक परामर्श, स्वास्थ्य जांच, पारिवारिक मामलों की काउंसलिंग और साइबर अपराध संबंधी समस्याओं के समाधान के साथ महिलाओं और नागरिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
शिविर में आयोजित प्रेस वार्ता में उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि पीड़ित महिला की समस्या का समाधान और उसे न्याय दिलाना आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि महिला आयोग केवल कार्यालय तक सीमित होकर काम करने के बजाय महिलाओं तक पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए प्रयासरत है। फोन, पुलिस थानों तथा शासन-प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर मौके पर ही समस्याओं के निस्तारण का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आयोग एक अभिभावक की भूमिका में पीड़ित महिलाओं को संरक्षण देने, टूटते परिवारों को जोड़ने और जरूरतमंद महिलाओं तक सहायता पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। कांवड़ यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यात्राएं केवल मंजिल तक पहुंचने का माध्यम नहीं, बल्कि हमारे विचारों और संस्कारों की पहचान भी होती हैं। ऐसे में कांवड़ यात्रा को नारी सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक संवेदनशीलता का संदेश बनाने की जिम्मेदारी समाज के प्रत्येक नागरिक की है।


7200 से अधिक जागरूकता किट वितरित
‘सम्मान सेतु’ अभियान के दौरान महिला अधिकारों, नए आपराधिक कानूनों, कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम (पॉश एक्ट) और नारी शक्ति वंदन अधिनियम से संबंधित 7200 से अधिक जागरूकता किट महिलाओं, कांवड़ श्रद्धालुओं और स्कूली बच्चों को वितरित की गईं। अभियान का उद्देश्य महिलाओं को उनके अधिकारों और कानूनों की जानकारी देने के साथ समाज में नारी सम्मान और संवेदनशीलता की भावना को मजबूत करना है।
आयोग के अनुसार शिविर में अब तक 578 लोगों को निशुल्क कानूनी परामर्श उपलब्ध कराया गया, जबकि 26 पारिवारिक मामलों में काउंसलिंग के माध्यम से समाधान कराया गया। एम्स ऋषिकेश के सहयोग से 489 से अधिक लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। वहीं, साइबर अपराध से संबंधित 124 मामलों का त्वरित निस्तारण किया गया।
महिलाओं को तकनीक से जोड़ने पर भी जोर
कुसुम कंडवाल ने बताया कि आयोग महिलाओं और युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए ‘यशोदा एआई’ प्रशिक्षण कार्यक्रम पर भी काम कर रहा है। इसके साथ ही वन स्टॉप सेंटर के कार्मिकों के प्रशिक्षण और कानूनों की समीक्षा से जुड़े विषयों पर भी कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि महिला आयोग का प्रयास है कि जागरूकता और सहायता से जुड़े ऐसे शिविर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित किए जाएं, ताकि महिलाएं, बेटियां और आम नागरिक अपने अधिकारों को समझें तथा आवश्यकता पड़ने पर कानून और प्रशासन की सहायता प्राप्त कर सकें।
‘सम्मान सेतु’ शिविर में उमड़ी भीड़ और उपलब्ध कराई जा रही विधिक एवं स्वास्थ्य सेवाओं को देखते हुए इसे नारी सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक जागरूकता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।