14 दिसंबर सोमवती अमावस्या पर होगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, भारत मैं नहीं दिखाई देगा, बन रहा है अनूठा पंच ग्रह युति योग

जातक पितृदोष से मुक्ति पाने के लिए करेंगे पित्र श्राद्ध व्रत तर्पण-
तुलसी परिक्रमा करने से होगी दरिद्रता दूर-
मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को सोमवती अमावस्या है। यह तिथि इस बार 14 दिसंबर सोमवार को पड़ रही है। यह सोमवती अमावस्या वर्ष 2020 की अंतिम सोमवती अमावस्या होगी। इस दिन साल का अंतिम पूर्ण सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। हालांकि यह ग्रहण विदेशों में ही नजर आएगा यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा और ना ही इस का सूतक लगेगा साथ ही 57 साल बाद पंच ग्रह युति योग ।सोमवती अमावस्या का संयोग भी बन रहा है। अमावस्या तिथि भगवान शिव के साथ पितरों को समर्पित होती है। इस दिन जातक अपने मृतक रिश्तेदारों की आत्मा की शांति के लिए पवित्र नदियों में डुबकी लगाकर प्रार्थना करते हैं वही इस दिन यज्ञ दान तप हवन अनुष्ठान करने से सुख सौभाग्य में वृद्धि हो कर दुख समाप्त होते हैं। साथ ही सोमवती अमावस्या के दिन 108 बार तुलसी की परिक्रमा करना ओंकार का जप करना सूर्यनारायण को अर्घ देना फलदाई होता है । तुलसी जी की 108 बार प्रदक्षिणा करने से घर की दरिद्रता दूर होती है।

बालाजी धाम काली माता मंदिर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित सतीश सोनी के अनुसार ज्योतिष गणना से ग्रहों की विभिन्न युती बनती हैं इसमें से 2 ग्रहों से लेकर 7 ग्रहों की युति बनती रहती हैं ।विशेष पर्व काल में अगर युति योग बनता है तो यह दान पुण्य जप तप हवन अनुष्ठान के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बार सोमवती अमावस्या पर पंच ग्रह युति बन रही है वृश्चिक राशि में सूर्य चंद्र बुध शुक्र केतु की युति रहेगी ।इसी युति का वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल से नवम पंचम दृष्टि संबंध भी बनेगा सन 1963 में पंचांग के पांच अंग जैसे थे वैसे ही 2020 में अमावस्या तिथि पर हैं जिसमें अमावस्या तिथि जेष्ठा नक्षत्र शूल योग चतुष्पाद करण वृश्चिक राशि का चंद्रमा पांच अंकों के साथ पंच ग्रही योग विशेष प्रबलता लिए हुए हैं। इसका असर कूटनीतिक क्षेत्रों में देखने को मिलेगा इस दृष्टि से देखें तो भारतीय विदेशी नीति आने वाले तीन सालों में बेहतर परिणाम देने वाली रहेगी वहीं भारत का विश्व में प्रभाव बढ़ेगा
