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*स्वाधीनता सेनानी कवि “श्रीराम शर्मा” की पुण्यतिथि पर किया गया ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन।*

ऋषिकेश दिनांक 18 जुलाई 2021_
महान स्वाधीनता सेनानी कवि श्री राम शर्मा प्रेम की 43वी पुण्य तिथि पर उन्हें आनलाइन गोष्ठी मे याद किया गया।
गोष्ठी मे डाo अतुल शर्मा ने बताया कि स्वाधीनता सेनानी कवि श्री राम शर्मा प्रेम ने जेलो मे कविताएं लिखी । 1944 मे उन्होने सैन्टरल सैकेटरियेट दिल्ली मे तिरंगा फहराकर गिरफ्तारी दी थी। वही उन्होंने कविता लिखी “मै चला आज सागर तरने को लेकर तरी पुरानी जग कहता ये नादानी”।
ऋषिकेश से आवाज संस्था के डा सुनील दत्त थपलियाल ने बताया कि वे आपने छात्रो के साथ ए एस एस के शिविरो मे श्रीराम शर्मा प्रेम की कालजयी कविता “करे राष्ट्रनिर्माण बनाये मिट्टी से सोना” वर्षों से गाते हैं।
इलाहाबाद से प्रसिद्ध गीतकार यश मालवीय ने उन्हे महाकवि बताते हुए कहा कि उनकी कविताये आज भी सामयिक है। खाड़ी टिहरी से अरण्य रंजन ने बताया कि कवि प्रेम कि कविता उन्होने गढवाल विश्व विद्यालय के बीए द्वितीय वर्ष के पाठ्यक्रम में पढी थी “अमर शहीद श्री देव सुमन”। कवयित्रि रंजना शर्मा ने उनकी प्रसिद्ध कविता “मसूरी” गा कर पुरानी याद ताजा़ कर दीं। उनकी कविताये समानता के लिये आवाज़ उठाती है। कहानीकार रेखा शर्मा ने उनकी कविता प्रस्तुत की “तुम स्वतंत्रता के लिये लडे़ मिल गई तुम्हे अब समानता के लिए लडो़ मिल जाएगी”।


इस आनलाइन गोष्ठी मे श्री राम शर्मा प्रेम की पुस्तको के विषय मे रुडकी के गोपाल नारसन ने बताया कि उनकी पहली कविता पुस्तक “अंगारे “1947 मे छपी थी। तथा धरती झुलसे पाव युग चरण जलती निशानी दिल्ली चलो आदि प्रमुख हैं।
उनपर कई शोधकर्ताओं ने कार्य किया है। और श्रीराम शर्मा प्रेम के सम्पूर्ण साहित्य पर पांच ग्रंथ प्रकाशित हुए हैं ।इनमे संस्मरणो के हरे गुलाब शताब्दी के हस्ताक्षर युगचरण अविराम सृजनयात्री अग्निपुरुष प्रमुख हैं ।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे डा अतुल शर्मा ने बताया कि उन पर एक डाक्यूमेंट्री फिल्म जयप्रकाश पंवार जे पी ने बनाई है, जो कि आज यूट्यूब मे बहुत देखी जा रही है ।श्रीराम शर्मा प्रेम का निधन 1978 की 18 जुलाई को देहरादून मे हुआ था ।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि श्रीराम शर्मा आज भी अपनी कविताओं मे जीवित है। कार्यक्रम में उन्हें सभी लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।