परमार्थ निकेतन में हर्षोल्लास से मनाया गया ईश्वर चंद्र विद्यासागर का जन्म दिवस
समाज सुधारक के रूप में पहचान रखने वाले ईश्वर चंद्र विद्यासागर का जन्म दिवस परमार्थ निकेतन में हर्षोल्लास से मनाया गया। इस दौरान आश्रम के स्वामी चिदानंद मुनि महाराज ने जनता को उनके जीवन से प्रेरणा लेने की अपील की।
शनिवार को परमार्थ निकेतन में सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें समाज सुधारक के नाम से प्रसिद्ध ईश्वर चंद्र विद्यासागर का जन्मदिन भी मनाया गया। मौके पर आश्रम के स्वामी चिदानंद मुनि महाराज ने विद्यासागर के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के समय में हमें विद्यासागर के जीवन से सीख लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा आज के समय में हमें विद्यासागर को अपना आदर्श मानकर चलना चाहिए ! जो धैर्य विद्यासागर के अंदर था वह यदि आज मनुष्य अपने अंदर धारण कर ले तो लोगों की जीवनशैली बदल जाएगी। लोगों को जानकारी देते हुए बताया कि ईश्वर चंद्र विद्यासागर 18वीं शताब्दी के प्रसिद्ध दार्शनिक शिक्षाविद समाज सुधारक लेखक अनुवादक मुद्रक प्रकाशक और परोपकारी व्यक्ति थे। उनको बंगाल के पुनर्जागरण के स्तंभों में से एक स्तम्भ के रूप में जाना जाता था। उनके प्रयास से ही कोलकाता में बालिका विद्यालयों की स्थापना भी हुई। उन्होंने विधवा पुनर्विवाह के लिए भी लोकमत तैयार किया था। जिसे 1856 ईसवी में सरकार ने पास कर दिया।

