2035 तक बनेगा भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन, पहले मॉड्यूल के विकास पर 1763 करोड़ खर्च होंगे

नई दिल्ली।25 मार्च 2026
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (बीएएस) के पांच मॉड्यूलों की समग्र संरचना तैयार कर ली है। इस संरचना की राष्ट्रीय स्तर की समीक्षा समिति द्वारा समीक्षा भी की जा चुकी है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सितंबर 2024 में गगनयान कार्यक्रम में संशोधन करते हुए वर्ष 2028 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के पहले मॉड्यूल के विकास और उसके प्रक्षेपण को मंजूरी प्रदान की थी। इसरो के विभिन्न केंद्रों और इकाइयों में इस मॉड्यूल की समग्र प्रणाली अभियांत्रिकी तथा विभिन्न उप-प्रणालियों के प्रौद्योगिकी विकास का कार्य वर्तमान में प्रगति पर है।
विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) ने भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के पहले मॉड्यूल के ढांचे के निर्माण के लिए भारतीय उद्योगों से रुचि की अभिव्यक्ति (एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट) भी जारी की है।
सरकार द्वारा फिलहाल भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के पहले मॉड्यूल के विकास और प्रक्षेपण को ही मंजूरी दी गई है। इसके लिए वर्ष 2025 से 2028 तक चार वर्षों की अवधि में लगभग 1763 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान लगाया गया है।
इस परियोजना का लक्ष्य वर्ष 2028 तक पहले मॉड्यूल को अंतरिक्ष में स्थापित करना तथा 2035 तक सभी पांच मॉड्यूलों को पूर्ण रूप से परिचालन योग्य बनाना है।
भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए कई महत्वपूर्ण तकनीकी लक्ष्यों को निर्धारित किया गया है, जिनमें डॉकिंग तकनीक, रोबोटिक्स, कक्षा में ईंधन भरने की प्रणाली, चालक दल के रहने की व्यवस्था, अंतरिक्ष यान के भीतर पहनने योग्य विशेष सूट तथा सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण प्रयोगों के लिए रैक शामिल हैं।
सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में होने वाले अनुसंधान के प्रमुख क्षेत्रों में जीवन विज्ञान, फार्मास्यूटिकल्स, पदार्थ विज्ञान और उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकियां शामिल रहेंगी।
कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय तथा प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

