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AAJ KA PANCHANG (आज का पंचाग) शनिवार saturday 12 December 2020 Haridwar – uttrakhand ,शनि प्रदोष व्रत, इस दिन भगवान शिव की आराधना से होती संतान की प्राप्ति ,शनि पीड़ा से मिलती हैं मुक्ति-

panchang पंचांग दिन शनिवार 12 दिसंबर 2020 मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष , शरद ऋतु ,सूर्य दक्षिणायन , शक सम्वत १९४२, प्रमादी नाम शुभ सवंत्सर 2077 , सूर्योदय ०७:०३ , सूर्यास्त १७:१८, तिथि त्रियोदशी २७:५५ तक , नक्षत्र विशाखा २८ :०५ तक,योग अतिगण्ड १२:०५ तक , करण तैतिल ०७:०४ तक द्वितीय करण गर , चंद्रमा तुला राशि मे २२:४१ तक पश्चात वृश्चिक राशि, राहुकाल ०९:३७ से १० :५४ तक, अभिजीत नक्षत्र ११ :५० से १२:३१ तक , दिशाशूल पूर्व

शनि प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त

त्रयोदशी तिथि आरंभ:12 दिसंबर सुबह 7 बजकर 4 मिनट से
त्रयोदशी तिथि समाप्त12 दिसंबर रात 3 बजकर 53 मिनट तक

आज सभी कार्यो के लिए शुभ समय 02:41pm से 15:57 pm
नए व्यपार के लिए शुभ समय
01:26 pm से 14:41pm
धार्मिक कार्यों के लिए शुभ समय
08:23am से 09:38 am

SATURDAY (शनिवार )

(शनि ग्रह की शांति के लिए हल्दी ,सोना ,पीला कपड़ा ,पीली वस्तुओ आदि दान करना शुभ माना जाता है )

शनि मन्त्र का जाप करना भी लाभ कारी होता है ।(मंत्र ;ॐप्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः )

शनिवार को उपवास करना चाहिए।
( नीलम रत्न धारण करना शुभ होता है )

AAJ KA GRAH GOCHAR
शनिवार 12 दिसम्बर २०२०

प्रातः काल सूर्योदय समय ग्रह स्थिति

(ग्रह -गोचर )aaj KA GRAH GOCHAR आज (ग्रह -गोचर )
सूर्य -वृश्चिक राशि ,चंद्र – तुला राशि ,मंगल -मीन राशि (वक्री), बुध वृश्चिक राशि,गुरु-मकर राशि , शुक्र -वृश्चिक राशि, शनि -मकर राशि,राहु -वृषभ राशि ,केतु -वृश्चिक राशि

शनि प्रदोष (व्रत कथा)

पौराणिक कथाओं अनुसार प्राचीन काल में एक विधवा ब्राह्मणी अपने पुत्र को लेकर भिक्षा लेने जाती और संध्या को लौटती थी। एक दिन जब वह भिक्षा लेकर लौट रही थी तो उसे नदी किनारे एक सुन्दर बालक दिखाई दिया जो विदर्भ देश का राजकुमार धर्मगुप्त था। शत्रुओं ने उसके पिता को मारकर उसका राज्य हड़प लिया था। उसकी माता की मृत्यु भी अकाल हुई थी। ब्राह्मणी ने उस बालक को अपना लिया और उसका पालन-पोषण किया। कुछ समय पश्चात ब्राह्मणी दोनों बालकों के साथ देवयोग से देव मंदिर गई। वहां उनकी भेंट ऋषि शाण्डिल्य से हुई।ऋषि शाण्डिल्य ने ब्राह्मणी को बताया कि जो बालक उन्हें मिला है वह विदर्भदेश के राजा का पुत्र है जो युद्ध में मारे गए थे और उनकी माता को ग्राह ने अपना भोजन बना लिया था। ऋषि शाण्डिल्य ने ब्राह्मणी को प्रदोष व्रत करने की सलाह दी। ऋषि आज्ञा से दोनों बालकों ने भी प्रदोष व्रत करना शुरू किया। एक दिन दोनों बालक वन में घूम रहे थे तभी उन्हें कुछ गंधर्व कन्याएं नजर आई। ब्राह्मण बालक तो घर लौट आया किंतु राजकुमार धर्मगुप्त “अंशुमती” नाम की गंधर्व कन्या से बात करने लगे। गंधर्व कन्या और राजकुमार एक दूसरे पर मोहित हो गए, कन्या ने विवाह करने के लिए राजकुमार को अपने पिता से मिलवाने के लिए बुलाया। दूसरे दिन जब वह दुबारा गंधर्व कन्या से मिलने आया तो गंधर्व कन्या के पिता ने बताया कि वह विदर्भ देश का राजकुमार है। भगवान शिव की आज्ञा से गंधर्वराज ने अपनी पुत्री का विवाह राजकुमार धर्मगुप्त से कराया। इसके बाद राजकुमार धर्मगुप्त ने गंधर्व सेना की सहायता से विदर्भ देश पर पुनः आधिपत्य प्राप्त किया। यह सब ब्राह्मणी और राजकुमार धर्मगुप्त के प्रदोष व्रत करने का फल था। स्कंदपुराण के अनुसार जो भक्त प्रदोषव्रत के दिन शिवपूजा के बाद एक्राग होकर प्रदोष व्रत कथा सुनता या पढ़ता है उसे सौ जन्मों तक कभी दरिद्रता नहीं होती।

भगवान् शिव माँ पार्वती आप सब की मनोकामना पूरी करे।

आपका दिन शुभ हो।

मं मनोज गिरी

ज्योतिष वाचस्पति