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गुरुकुल आयुर्वेदिक महाविद्यालय और पतंजलि योगपीठ ने किया स्वास्थ्य जागरूकता शिविर का आयोजन

हरिद्वार(संजय राजपूत) गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय खेल इकाई में उत्तराखण्ड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय परिषद के गुरुकुल आयुर्वेदिक महाविद्यालय और पतंजलि योगपीठ के द्वारा स्वास्थ्य जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर के मुख्य अतिथि गुरुकुल आयुर्वेदिक महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो0 अरूण कुमार त्रिपाठी ने कहा कि आयुर्वेद में तीन चीजों का विशेष महत्व है, वात, पीत एवं कफ समान हो, जठराग्नि सम हो, शरीर को धारण करने वाली सात धातुएं रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि मज्जा और वीर्य उचित अनुपात में हो और दसों इन्द्रियां आंख, नाक, कान, त्वचा, रसना, हाथ, पैर, जिह्वा, गुदा और उपस्थ। इस तरह के सभी गुण यदि मनुष्यों में पाए जाते हैं, उसकी आत्मा भी प्रसन्न रहती है। ऐसे व्यक्ति का स्वस्थ कहा जाता है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव व विशिष्ट अतिथि प्रो0 दिनेश चन्द्र भट्ट ने कहा कि वर्तमान में हमें जो कुछ खाने को मिल रहा है। वह सब विषैली दवाइयों द्वारा निर्मित है। बारह महिनों में जो कुछ फल व सब्जी आप चाहो उसे आप प्राप्त कर सकते हो। क्योंकि यह प्रेसिटाइज द्वारा तैयार हो रही है। शुद्ध फल और सब्जी मिलना मुश्किल हो गया है। इसलिए हमारे शरीर में जहर की मात्रा बढ़ती ही जा रही है। आज आदमी कम उम्र में ही समाज से विदा हो जाता है। इसका मूल कारण यह है कि सीजनल फल और सब्जियां मिलना बन्द हो गया है। हम सबको प्राचीन विधाओं पर ध्यान देना होगा। परीक्षा नियंत्रक प्रो0 एम0आर0 वर्मा ने कहा कि कोरोना काल में वर्तमान का युवा इस महामारी को नहीं झेल सका। जबकि हमारे वृद्ध इस बीमारी को झेलकर वापस लौट आए। इसलिए उत्तम स्वास्थ्य अनमोल रत्न है, जिसका मूल तब ज्ञात होता है जब वह खो जाता है। अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो0 पंकज मदान ने कहा कि अभियांत्रिकी एवं मेडिकल एक दूसरे के पूरक है। अभियांत्रिकी के बिना मेडिकल अधूरा है। उन्होंने कहा कि जितने भी मेडिकल में उपकरण प्रयोग किए जाते है वह सब अभियांत्रिकी की ही देन है। शिक्षकेत्तर कर्मचारी यूनियन के महामंत्री दीपक वर्मा ने कहा कि स्वास्थ्य जागरूकता शिविर को एक आन्दोलन बनाने की जरूरत है। स्वास्थ्य जागरूकता शिविर वर्तमान में गांव और शहरों में अवश्य लगने चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति का मेडिकल जांच समय-समय पर होना अत्यन्त आवश्यक है। इसलिए शिविर लगाने का लाभ आम आदमी तक पहुंचे तो अच्छा है। इस अवसर पर डा0 धर्मेन्द्र वालियान ने कहा कि स्वस्थ रहना सबसे बड़ा सुख है। पहला सुख निरोगी काया। कोई भी आदमी तभी अपने जीवन का पूरा आनन्द उठा सकता है। जब वह शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ हो। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है। इस अवसर पर डा0 एम0एम0 तिवारी, प्रो0 वीना आहुजा, डा0 विपुल शर्मा, डा0 रूद्रमन, गजेन्द्र रावत, संजीव लाम्बा, दलजीत सिंह बिष्ट, धनपाल, अशोक, संजय वर्मा, तरूण ऋषि इत्यादि उपस्थित रहे। इस शिविर में लगभग 50 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गयी। शिविर का संचालन डा0 धर्मेन्द्र वालियान ने किया।