भाड़ में जाये जनता…आओ सियासत करे
हरिद्वार।
नगर निगम पर वर्चस्व को लेकर भाजपा पार्षदों और कांग्रेसी मेयर की लड़ाई शहर की जनता को भुगतनी पड़ रही है। दोनों दलों के बीच चल रही सियासी नौटंकी में शहर की जनता इस रही है तो वही धर्म नगरी की आध्यात्मिक छवि दूरदराज से आने वाले श्रद्धालुओ पर क्या असर डाल रही है। भाजपाई जहां कांग्रेसी मेयर पर अपनी जिम्मेदारियों का भली-भांति निर्माण न करने का आरोप लगा रहे हैं। तो वहीं मेयर व उनके समर्थक शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक और नगर निगम के अधिकारियों और सहयोग न करने का आरोप लगा रहे हैं। नगर निगम में मेयर कांग्रेश की है, जबकि बोर्ड भाजपा का है जनहित के मुद्दों पर भले ही भाजपाई पार्षद मेयर के साथ होने की बात मीडिया के सामने जनता के कानों में पहुचाने के लिए बोल रहे है। लेकिन भीतर खाने दोनों दलों के बीच सियासी तलवारें खिंची हुई हैं। यदि भाजपाई पार्षद मेयर के साथ तालमेल बनाकर चलते जैसा के वो बार बार प्रदर्शित करते है तो आज शहर के हालात बदहाल न होते। इसका असर सफाई व्यवस्था पर साफ देखने को मिल रहा है। जब सफाई को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं। केआरएल की 4 दिन की हड़ताल में ही शहर कूड़ा कूड़ा हो गया यात्री बाहुल्य हरकी पेडी और मुख्य बाजार गंदगी से अटे पड़े हैं। इसके अलावा पूरे नगर निगम क्षेत्र में कूड़े के ढेर से उठ रही दुर्गंध से श्रद्धालुओं ओर स्थानीय जनता की भावनाएं आहत हो रही है। ऐसे में भीषण गर्मी में संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका से भी मना नहीं किया जा सकता है। पटरी से उतरी सफाई व्यवस्था को ढर्रे पर लाने की जिम्मेदारी को लेकर कोई भी गंभीर नहीं है। सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। धर्म नगरी का सियासी पारा गर्म आया हुआ है भाजपाई मेयर पर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन न करने का और शहरी विकास मंत्री करने का आरोप लगा रहे हैं। भाजपाइयों का आरोप है कि मेयर अपनी नाकामी को छिपाने के लिए मंत्री और अधिकारियों को बदनाम कर रही है। कहा कि मेयर और पूर्व सभासद अशोक शर्मा नौटंकी कर निगम का राजनीतिकरण कर रहे हैं। वही मेयर और उनके समर्थकों का कहना है कि शहरी विकास मंत्री के इशारे वर नगर आयुक्त कोई भी कार्य करने को तैयार नहीं है।

