योग भारत की प्राचीन और महान आध्यात्मिक परंपरा की धरोहर है: मुख्यमंत्री धामी

ऋषिकेश। अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दीप प्रज्वलित कर महोत्सव का विधिवत उद्घाटन किया।इस मौके पर उन्होंने देश-विदेश से आए योग साधकों और अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि योग के प्रति बढ़ता समर्पण पूरे वातावरण को योग, साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि योग भारत की प्राचीन और महान आध्यात्मिक परंपरा की धरोहर है। हजारों वर्षों से हमारे ऋषियों, मुनियों और योगाचार्यों ने शरीर और आत्मा के संतुलन का जो मार्ग दिखाया, वह आज विश्व के लिए आध्यात्मिक शांति का आधार बन चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज संपूर्ण विश्व जब तनाव और अवसाद से जूझ रहा है, ऐसे में हम योग के माध्यम से अपने मन को संतुलित कर सकते हैं। आज लोग योग के माध्यम से अपने जीवन को निखार रहे हैं।
उन्होंने कहा कि योग का शाब्दिक अर्थ है जोड़ना। योग जाति, धर्म और भूगोल की सभी सीमाओं को पार कर लोगों को जोड़ने का कार्य करता है। आज योग एक वैश्विक आंदोलन बन गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की भूमि प्राचीन काल से योग, साधना और आध्यात्म की भूमि रही है। यहां की पवित्र नदियां, शांत वातावरण और जलवायु योग साधना के लिए आदर्श वातावरण प्रदान करती हैं।
पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह योग महोत्सव संपूर्ण विश्व तक योग परंपरा की महिमा पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि उत्तराखंड की भूमि आध्यात्मिक साधना की भूमि है और योग हमारी प्राचीन परंपरा की अमूल्य धरोहर है। योग केवल स्वास्थ्य का आधार ही नहीं बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का मार्ग भी है। उन्होंने आगामी कुंभ मेला 2027 की तैयारियों का भी उल्लेख किया।

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि आज विश्व में अशांति का माहौल है, लेकिन योग के माध्यम से ही शांति स्थापित की जा सकती है। वहीं साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि मां गंगा की पावन धरती पर योग और अध्यात्म की साधना करना सौभाग्य की बात है।
प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि योग भारत की देन है और आज यह दुनिया को स्वस्थ जीवन का संदेश दे रहा है।
पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि योग सदैव अध्यात्म का केंद्र रहा है और अष्टांग योग के माध्यम से शारीरिक व मानसिक संतुलन प्राप्त किया जा सकता है।

गढ़वाल मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक प्रतीक जैन ने बताया कि इस वर्ष महोत्सव में अब तक लगभग 2500 योग साधकों ने पंजीकरण कराया है, जबकि 30 देशों के करीब 250 विदेशी अतिथि भी इसमें भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि योग नगरी ऋषिकेश आज विश्व को योग, प्राकृतिक चिकित्सा और अध्यात्म का संदेश दे रही है।
कार्यक्रम के दौरान गणेश वंदना के साथ गढ़वाली, राजस्थानी और पंजाबी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। इस अवसर पर योगाचार्यों, साधकों और स्थानीय लोगों की बड़ी संख्या मौजूद रही।

