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ऋषिकेश में अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव का समापन, राज्यपाल ने दिया शांति और अध्यात्म का संदेश


ऋषिकेश।22 मार्च 2026

अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव–2026 के समापन समारोह में प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) गुरमीत सिंह ने कहा कि यह आयोजन केवल समापन नहीं, बल्कि पूरी मानवता को अध्यात्म और शांति का संदेश देने वाला महोत्सव है। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश की पावन भूमि से योग का संदेश पूरे विश्व में गूंज रहा है और भारत “सबका भला, सबका विकास” के संकल्प के साथ विश्व पटल पर अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।
राज्यपाल ने कहा कि शांति बनाए रखने के लिए शक्ति का होना आवश्यक है। हमारी सनातन परंपरा, सांस्कृतिक धरोहर और जड़ों से जुड़ी सभ्यता ने ही हमें योग और आयुर्वेद जैसे अमूल्य ज्ञान दिए हैं। उन्होंने कहा कि गंगा की पवित्र धारा और हिमालय की गोद में बसे उत्तराखंड को ऋषि-मुनियों और तपस्वियों की भूमि माना जाता है, जो आज विश्व को योग विद्या का मार्ग दिखा रही है।


उन्होंने सिख धर्म के निशान के संदर्भ में कहा कि उसमें निहित तीन प्रतीक संत, विद्वान और सैनिक के आदर्शों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो समाज में संतुलन और सेवा की भावना को दर्शाते हैं। राज्यपाल ने कहा कि जहां संतों का सान्निध्य होता है, वहां अंत नहीं बल्कि निरंतर सीखने का अवसर मिलता है।
महोत्सव के दौरान विभिन्न आयामों पर आधारित कार्यक्रमों के साथ हेरिटेज ग्रुप, रन फॉर योगा और स्वच्छता मिशन जैसी गतिविधियां भी आयोजित की गईं। कार्यक्रम में विश्व के 33 देशों से आए लगभग 250 योग साधकों और 2850 भारतीय प्रतिभागियों ने भाग लिया। इसके साथ ही 180 विद्यालयों के विद्यार्थियों सहित 250 से अधिक योग, प्राणायाम, ध्यान, साधना और आयुर्वेद सत्र आयोजित किए गए।
राज्यपाल ने आयोजन की सफलता के लिए गढ़वाल मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक प्रतीक जैन की मंच से सराहना की और उन्हें मंच पर आमंत्रित कर योग साधकों व अतिथियों से तालियों के साथ सम्मानित कराया। साथ ही उन्होंने योगाचार्यों, साधकों और देश-विदेश से आए अतिथियों का स्वागत किया। विश्व जल दिवस के अवसर पर उन्होंने “जल ही जीवन है” का संदेश देते हुए जल संरक्षण पर भी बल दिया।
इस अवसर पर जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी ने कहा कि भारतीय संस्कृति अध्यात्म और दर्शन से समृद्ध है। संगीत, नृत्य और कला की परंपरा भी हमारी संस्कृति की पहचान है। उन्होंने कहा कि आज विश्व के 144 से अधिक देशों में लोग योग के माध्यम से भारतीय संस्कृति से जुड़ रहे हैं और समानता का भाव ही हमारी मूल पहचान है।
प्रदेश के वन, पर्यावरण एवं भाषा मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि राज्यपाल सदैव सकारात्मक सोच के साथ समाज को प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश योग की जननी है, जहां से आज पूरी दुनिया योग की धारा से जुड़ रही है।
समारोह के अंत में गढ़वाल मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक प्रतीक जैन ने राज्यपाल, मंत्री, योगाचार्यों, योग साधकों और सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महोत्सव को दिव्यता, भव्यता और नव्यता देने का प्रयास किया गया, जिसमें जनसहभागिता के कारण बड़ी सफलता मिली।
कार्यक्रम में नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष नीलम बिजल्वाण, सुनील भगत, प्रेम जी महाराज, उषा माता, हेमकुंड गुरुद्वारा प्रबंध समिति के नरेंद्र बिंद्रा, जिलाधिकारी टिहरी नितिका खंडेलवाल, महाप्रबंधक लक्ष्मी राज चौहान, कनिका आनंद, दीपक रावत, भारत भूषण कुकरेती, आशीष उनियाल, राजेंद्र ढोंडियाल, मेहरबान रांगड़, कैलाश कोठारी, सूर्यप्रकाश कोठारी, आशुतोष नेगी, अनिता मेवाड़ सहित निगम के सैकड़ों कर्मचारी मौजूद रहे।